उत्तराखंड

गंगोत्री हाईवे पर भू-धंसाव से बढ़ा खतरा, क्यार्क गांव के अस्तित्व पर मंडराया संकट

उत्तरकाशी। जनपद के भटवाड़ी क्षेत्र में पापड़गाड के समीप गंगोत्री हाईवे पर शुरू हुए भू-धंसाव ने एक बार फिर स्थानीय लोगों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। हाईवे पर करीब 50 मीटर लंबे हिस्से में पड़ी दरारें कुछ ही घंटों में चौड़ी हो गईं, जिससे सड़क और उसके ऊपर बसे क्यार्क गांव के अस्तित्व पर खतरा गहरा गया है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, गत वर्ष भी इसी स्थान पर भू-धंसाव के कारण गंगोत्री हाईवे कई दिनों तक बाधित रहा था। बावजूद इसके, एक वर्ष बीत जाने के बाद भी स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। सोमवार को सड़क पर आई दरारों के कारण लगभग चार घंटे तक यातायात पूरी तरह बंद रहा और केवल दोपहिया वाहनों को ही आवाजाही की अनुमति दी गई।

बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) ने दरारों को अस्थायी रूप से मिट्टी से भरकर मार्ग पर यातायात बहाल कर दिया है, लेकिन भारी वाहनों की आवाजाही और हल्की बारिश के दौरान दोबारा भू-धंसाव की आशंका बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते स्थायी सुरक्षा कार्य नहीं किए गए तो हाईवे का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है।

ग्रामीणों ने बताया कि पापड़गाड से बहकर आने वाला मलबा और बड़े बोल्डर गंगोत्री हाईवे के मोटर पुल के साथ-साथ क्यार्क गांव के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। पूर्व प्रधान विपिन राणा, रवि रावत और प्रताप प्रकाश पंवार ने भागीरथी नदी की ओर से सुरक्षात्मक कार्य कराने और स्थायी समाधान की मांग की है।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) और टीएचडीसी द्वारा क्षेत्र का सर्वेक्षण कराया जा रहा है। साथ ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। रिपोर्ट तैयार होते ही सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष अगस्त में इसी क्षेत्र में लगभग 100 मीटर गंगोत्री हाईवे धंस गया था, जिससे तीन दिनों तक यातायात पूरी तरह ठप रहा था। उस दौरान धराली और हर्षिल क्षेत्रों तक राहत एवं बचाव दलों को पहुंचने में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था क्योंकि इस मार्ग का कोई वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध नहीं है।

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